Indigo 1000 crore loss-
इंडिगो एयरलाइंस में जारी फ्लाइट कैंसिलेशन संकट ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाला है। व्यापार संगठन CTI के मुताबिक, 1 दिसंबर से अब तक हुए बड़े पैमाने पर कैंसिलेशन से उद्योग–व्यापार–पर्यटन सेक्टर को करीब 1,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। पिछले आठ दिनों में लगभग 5,000 उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं।
दिल्ली एयरपोर्ट पर रोज़ाना की यात्रा पर बड़ा असर
दिल्ली एयरपोर्ट से सामान्य दिनों में लगभग 1.5 लाख यात्री आवाजाही करते हैं। लेकिन लगातार उड़ानें रद्द होने से यात्री संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
खासकर व्यावसायिक यात्रियों की कमी से राजधानी के बिजनेस माहौल और कॉरपोरेट मीटिंग्स पर व्यापक प्रभाव पड़ा है।
बाजारों में 25% तक कम हुआ फुटफॉल
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, रोजाना लगभग 50 हजार व्यापारी दिल्ली आते थे, लेकिन फ्लाइट संकट के कारण यह संख्या तेजी से घटी है।
पिछले दस दिनों में दिल्ली के प्रमुख बाजारों — करोल बाग, सरोजिनी नगर, सदर बाजार और चांदनी चौक — में फुटफॉल में 25% की गिरावट देखी गई है।
प्रदर्शनियों में सहभागिता उम्मीद से बेहद कम
इन दिनों दिल्ली के प्रगति मैदान और आनंद मंडपम में ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, हैंडलूम और होम फर्निशिंग से जुड़ी प्रमुख प्रदर्शनियां चल रही हैं।
लेकिन देशभर से आने वाली व्यापारिक टीमें समय पर दिल्ली नहीं पहुंच पा रही हैं, जिसके कारण आयोजकों और प्रतिभागियों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
पर्यटन सीजन भी प्रभावित, बुकिंग में गिरावट
क्रिसमस से न्यू ईयर तक पर्यटन का पिक सीजन होता है, लेकिन फ्लाइट कैंसिलेशन के कारण होटल, ट्रैवल पैकेज और टूर बुकिंग्स में तेज गिरावट आई है।
मनोज ट्रेवल्स के डायरेक्टर मनोज खंडेलवाल ने बताया कि कई यात्रियों ने अपनी छुट्टियां रद्द या पोस्टपोन कर दी हैं।
डेस्टिनेशन वेडिंग्स पर असर, कई मेहमान नहीं पहुंच पाए
इवेंट और वेडिंग इंडस्ट्री भी फ्लाइट संकट की मार झेल रही है।
कई वेडिंग वैन्यू और रिसॉर्ट्स ने बताया कि मेहमानों की फ्लाइट रद्द होने से
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कई शादियां प्रभावित हुईं
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कुछ में दूल्हा–दुल्हन के परिवार के सदस्य भी समय पर नहीं पहुंच सके
होटल और बैंक्वेट बुकिंग में 10–20% तक गिरावट दर्ज की गई है।
DGCA की रिपोर्ट: नवंबर में ही 4,900 उड़ानें कम हुईं
DGCA के अनुसार, नवंबर में निर्धारित 64,346 उड़ानों में से केवल 59,438 उड़ानें ही संचालित हो पाईं। यानी लगभग 4,900 उड़ानें कम चलीं, जिससे एयरलाइन संचालन में पहले से ही दबाव था।
संकट कब खत्म होगा?
इंडस्ट्री विशेषज्ञों का अनुमान है कि
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स्टाफिंग समस्या,
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मौसम संबंधी देरी,
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और संचालन संबंधी चुनौतियाँ
इस संकट को बढ़ा रही हैं।
हालाँकि एयरलाइन ने स्थिति को सामान्य करने की दिशा में प्रयास तेज किए हैं, लेकिन यात्रियों और उद्योग जगत में बेचैनी अभी भी बनी हुई है।
