PM Modi manipur visit -इंफाल/चुराचांदपुर (मणिपुर)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (13 सितंबर 2025) मणिपुर के दौरे पर रहेंगे। यह यात्रा खास इसलिए है क्योंकि 2023 में राज्य में भड़की जातीय हिंसा के बाद यह प्रधानमंत्री का पहला दौरा है। उस हिंसा में 260 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और हजारों लोग विस्थापित हो गए थे। मोदी का यह दौरा मणिपुर में शांति और विकास को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
📌 दौरे का पूरा कार्यक्रम
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पीएम मोदी का कार्यक्रम मिजोरम की राजधानी आइजोल से शुरू होगा। यहां वे 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।
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बैराबी-सैइरांग रेलवे लाइन
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45 किमी लंबी आइजोल बाईपास रोड
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थेंजावल-सियालसुक और खंकॉर्न-रॉंगुरा रोड
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मुअलखांग में एलपीजी बॉटलिंग प्लांट
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छिमतुईपुई नदी पर पुल
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खेलो इंडिया मल्टीपर्पज इंडोर हॉल
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इसके बाद प्रधानमंत्री मणिपुर के चुराचांदपुर जाएंगे। यह इलाका 2023 की जातीय हिंसा में सबसे अधिक प्रभावित रहा था और यहां कुकी समुदाय की बड़ी आबादी है। 1988 के बाद यह पहला मौका होगा जब कोई प्रधानमंत्री चुराचांदपुर पहुंचेगा।
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दोपहर 2:30 बजे पीएम मोदी राज्य की राजधानी इंफाल पहुंचेंगे। यहां वे 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और कांगड़ा किला में एक जनसभा को संबोधित करेंगे।
📌 इंफाल में लॉन्च होने वाली प्रमुख परियोजनाएं
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नया पुलिस मुख्यालय (लागत 101 करोड़ रुपये)
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नया सिविल सचिवालय (लागत 538 करोड़ रुपये)
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3,647 करोड़ रुपये की ड्रेनेज और एसेट मैनेजमेंट सिस्टम परियोजना
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550 करोड़ रुपये का मणिपुर इन्फोटेक डेवलपमेंट (MIND) प्रोजेक्ट
📌 आधिकारिक बयान और पीएम का संदेश
मणिपुर के मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल ने कहा—
“प्रधानमंत्री का दौरा राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के साथ विकास को नई गति देगा। सभी नागरिकों से अपील है कि वे स्वागत और कार्यक्रमों में भाग लें।”
प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने X (पूर्व ट्विटर) पोस्ट में लिखा—
“मैं आज चुराचांदपुर और इंफाल में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लूंगा। मणिपुर के सर्वांगीण विकास के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। कई रोड प्रोजेक्ट, राष्ट्रीय राजमार्ग, महिला होस्टल और अन्य योजनाओं का शिलान्यास किया जाएगा।”
📌 पृष्ठभूमि: मणिपुर हिंसा 2023
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3 मई 2023 को हिल जिलों में ‘ट्राइबल सॉलिडैरिटी मार्च’ आयोजित किया गया।
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यह मार्च मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग के विरोध में हुआ था।
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इसके बाद जातीय संघर्ष भड़क उठा और यह दशकों की सबसे गंभीर हिंसा में बदल गया।
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विपक्ष ने उस समय पीएम मोदी की अनुपस्थिति को मुद्दा बनाया और अगस्त 2023 में अविश्वास प्रस्ताव तक पेश किया।
