Hindu Sammelan Raipur -“जाति, धन और भाषा के आधार पर मत आंकिए, पूरा भारत मेरा है” – मोहन भागवत
छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के सोनपैरी गांव में आयोजित हिंदू सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और अनुशासित नागरिक जीवन पर जोर देते हुए लोगों से मतभेदों से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के लिए मिलकर काम करने की अपील की।
भागवत ने कहा कि लोगों को जाति, धन, भाषा या क्षेत्र के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए और देश सभी का है। उन्होंने सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने के लिए अलगाव और भेदभाव की भावना को समाप्त करने की आवश्यकता बताई।
🗣️ “मंदिर, जलस्रोत और श्मशान घाट सभी हिंदुओं के लिए खुले हों”
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि—
“मंदिर, जल निकाय और श्मशान घाट, चाहे किसी ने भी स्थापित किए हों, सभी हिंदुओं के लिए खुले होने चाहिए।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक कार्य संघर्ष का नहीं, बल्कि जोड़ने का माध्यम होना चाहिए। यह प्रक्रिया समाज को बांटने के बजाय एकता की ओर ले जाती है।
🏠 ‘कुटुंब प्रबोधन’ का अर्थ समझाया
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में ‘कुटुंब प्रबोधन’ की अवधारणा को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा—
सप्ताह में कम से कम एक दिन परिवार के साथ समय बिताएं
घर में भजन, संवाद और साथ भोजन की परंपरा को पुनर्जीवित करें
देश और समाज के लिए समय और संसाधन देने पर विचार करें
उन्होंने कहा कि यदि हम अपने परिवार के लिए समय और पैसा देते हैं, तो देश के लिए भी योगदान देना हमारा दायित्व है—इसी सोच को कुटुंब प्रबोधन कहा गया है।
🌱 पर्यावरण संरक्षण पर जोर
पर्यावरण को लेकर भागवत ने लोगों से अपील की कि वे—
पानी बचाएं
वर्षा जल संचयन (Water Harvesting) अपनाएं
छोटे जल स्रोत विकसित करें
सिंगल यूज़ प्लास्टिक से बचें
अधिक से अधिक पेड़ लगाएं
उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण क्षरण पर चिंता जताते हुए कहा कि संरक्षण की शुरुआत घर से होनी चाहिए।
🗣️ मातृभाषा, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की वकालत
मोहन भागवत ने कहा कि—
घर में मातृभाषा का प्रयोग होना चाहिए
भारत की सभी भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं
स्थानीय रूप से बने स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए
उन्होंने विनोबा भावे का उल्लेख करते हुए कहा कि अपने दम पर जीना और रोजगार सृजन करना ही सच्ची आत्मनिर्भरता है।
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📜 संविधान, कानून और नागरिक अनुशासन का पालन जरूरी
RSS प्रमुख ने लोगों से—
संविधान और कानूनों का पालन
नागरिक कर्तव्यों को समझने
अनुशासित जीवन अपनाने
की अपील की। उन्होंने कहा कि कुछ नियम लिखित नहीं होते, लेकिन उनका पालन करने से श्रेष्ठ समाज का निर्माण होता है—जैसे बड़ों का सम्मान, जरूरतमंद की मदद और अतिथि सत्कार।
🚫 नशा, अकेलापन और सामाजिक जिम्मेदारी
भागवत ने नशे की समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि अकेलापन लोगों को नशे की ओर धकेलता है। उन्होंने सामाजिक जुड़ाव और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा—
“अगर देश खतरे में है, तो परिवार भी खतरे में है।”
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📌 सामाजिक समरसता का संदेश
अपने संबोधन के अंत में मोहन भागवत ने कहा—
“लोगों को जाति, धन, भाषा या क्षेत्र के आधार पर मत आंकिए। सभी को अपना समझिए। पूरा भारत मेरा है।”
उन्होंने इसे सामाजिक समरसता की मूल भावना बताया और कहा कि सार्वजनिक सुविधाएं और धार्मिक स्थल सभी के लिए समान रूप से खुले होने चाहिए।