Chhattisgarh Cow Accident: तीन जगहों पर 17 गायों की मौत
छत्तीसगढ़ गाय हादसा में मंगलवार (16 सितंबर) रात को 3 अलग-अलग जगहों पर ट्रकों की चपेट में आकर 17 मवेशियों की मौत हो गई।
पहली घटना बिलासपुर की है, जहां रतनपुर रोड पर तेज रफ्तार ट्रक ने गायों के झुंड को कुचल दिया। इसमें गर्भवती गाय समेत 8 गायों की मौत हो गई। गर्भवती गाय का पेट फट गया और उसका बछड़ा बाहर निकल आया। यह घटना कोनी थाना क्षेत्र की है।
दूसरी घटना दुर्ग जिले की है, जहां बाफना टोल प्लाजा के पास सड़क पर बैठी 8 गायों को कंटेनर ने कुचल दिया। सभी की मौके पर ही मौत हो गई। तीसरी घटना कांकेर जिले की है, जहां चारामा में NH-30 पर ट्रक ने दो मवेशियों को कुचल दिया। इसमें एक की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया।
केस-1: बिलासपुर में चक्काजाम और गुस्सा

बिलासपुर के ग्राम गतौरी स्थित सीमा फ्यूल्स के पास बिलासपुर-कोरबा नेशनल हाईवे पर बड़ी संख्या में गायें बैठी थीं। ट्रक चालक ने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए उन्हें कुचल दिया।
गर्भवती गाय का पेट फटने और बछड़ा बाहर आने की घटना ने गौ सेवकों को आक्रोशित कर दिया। उन्होंने रातभर चक्काजाम कर दिया, जिससे छत्तीसगढ़ गाय हादसा ने और तूल पकड़ लिया।
केस-2: दुर्ग में कंटेनर ने 8 गायों को कुचला

दुर्ग जिले के बाफना टोल प्लाजा के पास एक कंटेनर ने सड़क किनारे बैठी 8 गायों को कुचल दिया। सभी की मौके पर मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कंटेनर तेज गति से आ रहा था। चालक को कार्यकर्ताओं ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने कंटेनर जब्त कर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया। प्राथमिक जांच में पता चला कि चालक नशे में हो सकता है।
केस-3: कांकेर में ट्रक ने दो मवेशियों को कुचला

कांकेर जिले के चारामा में NH-30 पर ट्रक ने देर रात दो मवेशियों को कुचल दिया। इस छत्तीसगढ़ गाय हादसा में एक मवेशी की मौत हुई और दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया।
गौ सेवकों ने घायल मवेशी को पशु चिकित्सालय भिजवाया। स्थानीय लोगों ने कहा कि इस क्षेत्र में लाइट बंद होने और प्रशासन की लापरवाही के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं।
डेढ़ महीने में 70 मवेशियों की मौत
बिलासपुर जिले में डेढ़ महीने में यह पांचवां बड़ा हादसा है। इस दौरान करीब 70 मवेशियों की मौत हो चुकी है। बारिश के दिनों में सड़क पर बैठे जानवरों को लेकर हादसे बढ़ गए हैं।
हाईकोर्ट का आदेश, फिर भी हादसे जारी
हाईकोर्ट पहले ही आदेश दे चुका है कि सड़कों से मवेशियों को हटाया जाए। लेकिन प्रशासन का दावा सिर्फ दिखावा साबित हो रहा है।
रेडियम बेल्ट और मालिकों पर एफआईआर जैसी कार्रवाई का दावा तो है, लेकिन हकीकत यह है कि छत्तीसगढ़ गाय हादसा जैसी घटनाएं लगातार हो रही हैं।
