Bhupesh Baghel In Supreme Court-
नई दिल्ली/रायपुर, 6 अगस्त 2025
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई और मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 44 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले की सुनवाई आज होनी है, जिसमें बघेल की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल पक्ष रखेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि सिब्बल आज मौजूद रहते हैं तो सुनवाई आज ही होगी, वरना कल तक स्थगित की जाएगी—उसके बाद और आगे नहीं बढ़ेगी।
SC की तीन जजों की बेंच करेगी सुनवाई
इस याचिका की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भूयानंद और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिस्वर सिंह की पीठ करेगी।
पिछली सुनवाई (4 अगस्त) के दौरान कोर्ट ने हाईकोर्ट में जाने की सलाह दी थी, लेकिन एडवोकेट सिब्बल ने बताया कि पहले से ही धारा 44 पर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लंबित है, जिसे भूपेश बघेल की याचिका से जोड़ दिया गया है।
ED की कार्रवाई पर बघेल का पलटवार: “बिना अनुमति जांच क्यों?”
पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने मंगलवार को प्रेस से चर्चा करते हुए कहा—”हमने सुप्रीम कोर्ट में PMLA की तीन धाराओं को चुनौती दी है, खासकर धारा 44 को। अगर किसी केस में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, तो दोबारा जांच करने से पहले कोर्ट से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। लेकिन आज तक ED ने किसी केस में यह अनुमति नहीं ली।”
उन्होंने धारा 50 को भी गलत बताया—”जिसके खिलाफ आरोप है, उसी से गवाही ली जा रही है। कोई अपने खिलाफ गवाही कैसे देगा?”

बेटे की गिरफ्तारी पर बोले- “NBW वाले खुले घूम रहे हैं”
बघेल ने आगे कहा—”जिसके खिलाफ नॉन बेलेबल वारंट (NBW) है, वो आज़ाद घूम रहा है, लेकिन मेरे बेटे को बिना ठोस आधार के गिरफ्तार कर लिया गया। आखिर यह कौन सी प्रक्रिया है?”
उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्यवाही दुर्भावनापूर्ण है और ED केवल राजनीतिक प्रतिशोध के तहत काम कर रही है।
चैतन्य केस का भी दिया हवाला
भूपेश बघेल ने उदाहरण देते हुए बताया कि एक अन्य मामले (चैतन्य केस) में भी पुराने मामलों को दोबारा उठाकर गिरफ्तारी की गई थी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाईकोर्ट जाने की लिबर्टी दी है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए अब खुद सर्वोच्च अदालत में सुनवाई हो रही है।
निष्कर्ष:
भूपेश बघेल की याचिका केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि PMLA जैसे कठोर कानून की प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस पर क्या रुख अपनाता है।
