Bastar Naxal Operation: सरेंडर नक्सली के खुलासे, पुलिस की रडार पर पश्चिम बस्तर का बड़ा कमांडर
Naxalites in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे सघन अभियान के बीच खूंखार नक्सली पापाराव को लेकर बड़े खुलासे सामने आए हैं। हाल ही में सरेंडर किए नक्सलियों ने बताया है कि पापाराव अब भी 25 से 30 हथियारबंद साथियों के साथ जंगल में सक्रिय है और फिलहाल आत्मसमर्पण के लिए तैयार नहीं है।
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पापाराव को पश्चिम बस्तर क्षेत्र में बचे गिने-चुने बड़े नक्सली नेताओं में से एक मान रही हैं।
📍 दंतेवाड़ा में 63 नक्सलियों ने किया सरेंडर
शुक्रवार को दंतेवाड़ा जिले में 63 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। इनमें कई बड़े कैडर के नक्सली शामिल हैं।
सरेंडर करने वालों में नक्सलियों का DVCM (डिविजनल कमेटी मेंबर) मोहन कड़ती भी शामिल है।
मीडिया से बातचीत में मोहन कड़ती ने जंगल में बचे नक्सलियों को लेकर कई अहम जानकारियां साझा कीं।
🗣️ सरेंडर नक्सली का दावा: पापाराव अभी भी हथियारबंद
सरेंडर नक्सली मोहन कड़ती के मुताबिक—
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पापाराव अब भी 25–30 हथियारबंद नक्सलियों के साथ घूम रहा है
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वह आत्मसमर्पण के लिए राजी नहीं है
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राहुल और दिलीप जैसे अन्य बड़े नक्सलियों की टीमें भी अभी जंगल में मौजूद हैं
इन खुलासों के बाद सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और बढ़ा दी गई है।
❓ कौन है नक्सली पापाराव
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार:
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पापाराव छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है
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वह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य है
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पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज रह चुका है
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दक्षिण सब-जोनल ब्यूरो का भी सदस्य है
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आमतौर पर AK-47 हथियार के साथ रहता है
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उसके साथ 30–40 नक्सली तैनात रहते हैं
बताया जाता है कि पापाराव को बस्तर के जंगल, पहाड़ और इलाके की गहरी जानकारी है, जिसकी वजह से वह कई मुठभेड़ों में बचकर निकल चुका है।

🚔 पुलिस की रडार पर पापाराव
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यदि पापाराव का संगठन कमजोर पड़ता है या वह सरेंडर करता है, तो पश्चिम बस्तर डिवीजन को बड़ा झटका लगेगा।
पुलिस लगातार:
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पापाराव की लोकेशन ट्रेस कर रही है
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उससे सरेंडर की अपील की जा रही है
अधिकारियों का कहना है कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे के लक्ष्य के तहत अभियान को और तेज किया गया है।

⚠️ नक्सल विरोधी अभियान तेज
छत्तीसगढ़ में अब नक्सलियों की संख्या पहले के मुकाबले काफी कम हो चुकी है, लेकिन बचे हुए सक्रिय नक्सली अब भी सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में सरेंडर नक्सलियों से मिल रही जानकारी को ऑपरेशन के लिए अहम इनपुट माना जा रहा है।

