Who is Ahmed al Ahmed -ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में बॉन्डी बीच पर हुए आतंकी हमले के दौरान 44 साल के अहमद अल-अहमद ने अदम्य साहस दिखाकर कई लोगों की जान बचाई। जश्न मना रही भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग कर रहे आतंकी से अहमद बिना किसी हथियार के भिड़ गए और उसकी राइफल छीन ली।
आतंकी से भिड़ने से पहले भाई से कहा, कुछ हुआ तो कहना लोगों को बचाते हुए मरा
जब अहमद आतंकी साजिद अकरम की ओर बढ़ रहे थे, तब उनके भाई ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस पर अहमद ने कहा, “अगर मुझे कुछ हो जाए, तो परिवार को बताना कि मैं लोगों की जान बचाते हुए गया।” इसके बाद वे सीधे हमलावर की ओर दौड़ पड़े।
हनुक्का उत्सव में शामिल होने आए थे अहमद, अचानक मच गई अफरातफरी
अहमद अपने चचेरे भाई जोजाय अलकंज के साथ बॉन्डी बीच पर हनुक्का उत्सव में शामिल होने पहुंचे थे। दोनों कॉफी पीने बाहर निकले ही थे कि अचानक गोलीबारी की आवाजें सुनाई दीं। दो हमलावर भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग कर रहे थे, लोग चीखते-चिल्लाते इधर-उधर भागने लगे।
निहत्थे होकर भी अहमद ने पीछे से आतंकी पर झपट्टा मारा
अहमद और उनके चचेरे भाई कारों के पीछे छिप गए। जोजाय डर से कांप रहे थे, लेकिन अहमद ने हिम्मत दिखाई। मौका मिलते ही वे कारों के पीछे से निकले और पीछे से झपट्टा मारकर 50 साल के आतंकी साजिद अकरम की राइफल छीन ली।

राइफल छिनते ही भागा आतंकी, लोगों को मिला सुरक्षित निकलने का मौका
अहमद ने राइफल आतंकी की ओर तान दी, जिससे वह घबरा गया और पीछे की ओर भागने लगा। इस दौरान कई लोगों को वहां से सुरक्षित निकलने का मौका मिला। अहमद ने राइफल एक पेड़ के पास रख दी, क्योंकि उन्हें बंदूक चलानी नहीं आती थी।



दूसरे आतंकी ने पीछे से मारी गोलियां, अहमद गंभीर रूप से घायल

इसी दौरान आतंकी साजिद के बेटे नवीद अकरम ने पीछे से अहमद पर हमला कर दिया। दो गोलियां अहमद के बाएं कंधे में लगीं और वे बेहोश होकर गिर पड़े। बावजूद इसके, उनकी बहादुरी ने हालात को बदल दिया।
अहमद बोले, ईश्वर ने उस पल ऐसी ताकत दी जो पहले कभी महसूस नहीं हुई
अहमद ने बाद में बताया कि उस वक्त उन्हें नहीं पता था कि वे क्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने उन्हें ऐसी शक्ति दी, जो उन्होंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। उनके लिए उस पल सिर्फ एक ही मकसद था—किसी भी कीमत पर लोगों को बचाना।
अस्पताल में भर्ती अहमद की हालत स्थिर, पिता बोले- निर्दोषों को बचाया
अहमद फिलहाल सेंट जॉर्ज अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी सर्जरी हो चुकी है और हालत स्थिर बताई जा रही है। उनके पिता ने कहा कि वे भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं कि उनके बेटे ने निर्दोष लोगों को हत्यारों से बचाया।
सीरिया से भागकर ऑस्ट्रेलिया आए थे अहमद, दो बेटियों के पिता हैं
अहमद मूल रूप से सीरिया के रहने वाले हैं। 2006 में गृहयुद्ध के चलते वे ऑस्ट्रेलिया आए थे। वे मुस्लिम समुदाय से हैं और सिडनी में तंबाकू की दुकान चलाते हैं। अहमद पांच और छह साल की दो बेटियों के पिता हैं।
नागरिकता को लेकर भी रहा संघर्ष, 2022 में मिली ऑस्ट्रेलियाई नागरिकता
अहमद के वकील के मुताबिक, 2019 में उन्हें नागरिकता देने से इनकार किया गया था, लेकिन बाद में आरोप हटने के बाद 2022 में उन्हें ऑस्ट्रेलियाई नागरिकता मिली। वकील ने कहा कि अहमद मेहनती और कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं।
ट्रम्प और ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने की बहादुरी की तारीफ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में एक बहादुर व्यक्ति ने सीधे हमलावर पर हमला कर कई लोगों की जान बचाई, उनके प्रति उनके मन में गहरा सम्मान है।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि खतरे के वक्त दूसरों की मदद के लिए दौड़ पड़ना ही असली ऑस्ट्रेलियाई भावना है।
जनता ने जुटाए ₹3.43 करोड़, गोफंडमी पर उमड़ा समर्थन
अहमद के इलाज और परिवार की मदद के लिए लोगों ने GoFundMe के जरिए 5.7 लाख डॉलर यानी करीब ₹3.43 करोड़ की फंडिंग जुटाई है। इसमें हजारों लोगों ने योगदान दिया, अमेरिकी अरबपति बिल एकमैन ने भी 1 लाख डॉलर दान किए।

हनुक्का फेस्टिवल को बनाया गया था निशाना, सुरक्षा बढ़ाई गई
हमला उस वक्त हुआ जब यहूदी समुदाय के लोग हनुक्का फेस्टिवल मना रहे थे। घटना के बाद मेलबर्न में होने वाला हनुक्का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया और पूरे देश में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

