Naxalites Refuse Peace -वायरल प्रेस नोट को बताया फर्जी, सोनू का फैसला निजी; ऑपरेशंस में लगातार ढेर हो रहे बड़े नक्सली
रायपुर/दंतेवाड़ा:
नक्सलियों की केंद्रीय समिति और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) ने सोमवार को संयुक्त बयान जारी कर शांति वार्ता की संभावनाओं को खारिज कर दिया। प्रेस नोट में साफ कहा गया है कि वे हथियार नहीं छोड़ेंगे और शांति वार्ता में शामिल नहीं होंगे।
प्रवक्ता अभय और विकल्प ने यह भी स्पष्ट किया कि हाल ही में अभय के नाम से वायरल प्रेस नोट और ऑडियो क्लिप पार्टी का आधिकारिक बयान नहीं था, बल्कि पोलित ब्यूरो सदस्य सोनू का व्यक्तिगत फैसला था।

नक्सलियों का तर्क
हथियारबंद संघर्ष छोड़ना पार्टी को “संशोधनवादी संगठन” बना देगा।
बसवा राजू की वार्ता कोशिशों को गलत ढंग से पेश किया गया।
शांति वार्ता की बात पार्टी में मतभेद और विभाजन पैदा कर सकती है।
हालिया घटनाक्रम
17 सितंबर को एक प्रेस नोट वायरल हुआ था, जिसमें खुद को अभय बताकर कहा गया कि माओवादी सरकार से शांति वार्ता के लिए तैयार हैं।
इसके साथ ही एक ऑडियो भी सामने आया था।
अब सेंट्रल कमेटी ने इस नोट को फर्जी बताते हुए खारिज कर दिया है।
सुरक्षाबलों का दबाव और अमित शाह की डेडलाइन
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अगस्त 2024 में कहा था कि मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म कर दिया जाएगा।
इसके बाद से बस्तर और बॉर्डर इलाकों में ऑपरेशन और तेज हो गए हैं।
हालिया एनकाउंटर और बड़ी सफलता
21 मई 2024: कर्रेगुट्टा ऑपरेशन में 31 नक्सली मारे गए, जिनमें 1.5 करोड़ का इनामी बसवा राजू भी शामिल।
सितंबर 2024: गरियाबंद में डेढ़ करोड़ का इनामी मोडेम बालकृष्ण समेत 10 नक्सली ढेर।
पिछले 25 सालों में बस्तर में 3366 से ज्यादा मुठभेड़, 1324 जवान शहीद और 1510 से ज्यादा नक्सली मारे गए।
बड़े नक्सली हमलों की याद
पिछले 25 सालों में बस्तर में पुलिस और नक्सलियों के बीच कुल 3366 से ज्यादा मुठभेड़ हुईं। अलग-अलग घटनाओं में 1324 जवानों की शहादत हुई है, जबकि, फोर्स ने 1510 से ज्यादा नक्सलियों का एनकाउंटर कर दिया है।
साल 2022-23 के बाद से बस्तर की परिस्थितियां बदली हैं। पिछले 2 से ढाई सालों में 88 जवान शहीद हुए हैं। इनमें ज्यादातर जवान IED ब्लास्ट की चपेट में आए हैं।
2007 में 200 जवानों ने दी कुर्बानी
बस्तर में साल 2007 में नक्सलियों ने रानी बोदली में सुरक्षाबलों के कैंप पर हमला किया था। इस घटना में जवानों ने नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब भी दिया था। नक्सलियों से लड़ते हुए जवानों की गोलियां खत्म हो गई थी, जिसके बाद नक्सली कैंप में घुसे और पेट्रोल बम दागना शुरू कर दिए थे।
इस घटना में 55 जवान शहीद हुए थे। जगह-जगह लाशों के ढेर थे। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद यह बस्तर की पहली सबसे बड़ी नक्सल घटना थी। इस घटना ने पूरे देश को रुलाया था। इसी साल इस घटना के साथ ही अन्य घटनाओं में 200 से ज्यादा जवानों की शहादत हुई।
2010 में 171 जवान शहीद
साल 2010 में ताड़मेटला में देश की सबसे बड़ी नक्सल घटना हुई थी। यहां नक्सलियों ने जवानों को एंबुश में फंसाया था। माओवादियों ने जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस घटना में 76 जवान शहीद हुए थे। घटना स्थल का मंजर ऐसा था कि जहां नजर पड़े वहां जवानों की लाश बिखरी पड़ी थी।
इसी साल नक्सलियों ने चिंगावरम में एक बस को IED ब्लास्ट कर उड़ाया था, जिसमें 20 जवान शहीद हुए थे। कुल मिलाकर 2010 में अलग-अलग नक्सल घटनाओं में कुल 171 जवानों ने अपना बलिदान दिया था।
