Mental Health Problem In Genz –
आज की तेज रफ्तार और बदलती लाइफस्टाइल में Gen Z और मिलेनियल्स का तनाव लगातार बढ़ रहा है। डेलॉइट के नए ग्लोबल सर्वे के अनुसार युवाओं की सबसे बड़ी टेंशन पैसों की कमी, बढ़ते खर्च और नौकरी की अनिश्चितता है। सर्वे में 44 देशों के 23,000 लोगों ने हिस्सा लिया, जिसमें 14,468 Gen Z और 8,853 मिलेनियल्स शामिल थे।
आर्थिक असुरक्षा बना तनाव की सबसे बड़ी वजह
सर्वे में कई युवाओं ने कहा कि उन्हें अपने भविष्य की आर्थिक सुरक्षा की चिंता है। बढ़ते खर्च, नौकरी का दबाव और सेविंग न कर पाने की समस्या उन्हें लगातार तनाव में रख रही है।
नौकरी का दबाव भी बढ़ा रहा स्ट्रेस
लगातार काम का दबाव युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है। 36% Gen Z, 33% मिलेनियल्स का कहना है कि उनकी जॉब ही तनाव का सबसे बड़ा स्रोत है।
लंबे काम के घंटे, वर्क कल्चर, काम की सराहना न मिलना, अनफेयर एनवायरनमेंट और पोस्ट-कोविड बर्नआउट अभी भी युवाओं को प्रभावित कर रहे हैं।
ऑफिस में बात रखने से डरते हैं युवा
कई युवा अपनी समस्याएँ ऑफिस में बताने से हिचकिचाते हैं— 62% Gen Z ,61% मिलेनियल्स को डर है कि शिकायत करने से उनकी नौकरी पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा 60% से अधिक युवाओं को लगता है कि उनकी कंपनी पारदर्शिता और फैसलों के मामले में कमजोर है।
बढ़ता अकेलापन भी बड़ी समस्या
हर तीसरा Gen Z खुद को अकेला महसूस करता है।
वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड मॉडल के बावजूद Loneliness की समस्या खत्म नहीं हो रही है।
कई युवाओं को लगता है कि उनका काम महत्वपूर्ण नहीं है, जिससे काम में दिलचस्पी और मानसिक ऊर्जा दोनों कम होती जा रही है।
माइक्रो मैनेजमेंट से तनाव बढ़ रहा
कई Gen Z कर्मचारी बताते हैं कि छोटी-छोटी चीज़ों पर कंट्रोल और लगातार निगरानी से उनके तनाव, थकान और काम के प्रति उत्साह
पर बुरा असर होता है।
🧠 कंपनियाँ दे रही मेंटल हेल्थ सपोर्ट, लेकिन इस्तेमाल कम
कई कंपनियों में अब वेलनेस प्रोग्राम काउंसलिंग मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन
जैसी सुविधाएँ बढ़ी हैं, पर इनका उपयोग कम लोग कर रहे हैं।
ज्यादा तनाव में रहने वाले युवाओं में— केवल 46% Gen Z और 48% मिलेनियल्स इन सेवाओं का उपयोग करते हैं।
WHO का बड़ा खुलासा
WHO के अनुसार डिप्रेशन और एंग्जायटी की वजह से हर साल 12 अरब कार्यदिवस बर्बाद होते हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी भारी असर पड़ता है।
Disclaimer
यह जानकारी विभिन्न ग्लोबल रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह न समझें। किसी भी मानसिक स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर या विशेषज्ञ से अवश्य सलाह लें।
