Kanker Tribal Christian Community Clashed-
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में शव दफनाने को लेकर आदिवासी और धर्मांतरित ईसाई समुदाय के बीच हिंसक झड़प हो गई। आमाबेड़ा थाना क्षेत्र के बड़े तेवड़ा गांव में शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। हालात बेकाबू होने पर भीड़ ने दो चर्चों में आग लगा दी। घटना में ASP अंतागढ़ समेत 20 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है।
शव दफनाने को लेकर भड़का विवाद
विवाद की जड़ गांव के सरपंच रजमन सलाम के पिता चमरा राम की मौत है। सरपंच के परिवार ने धर्म परिवर्तन कर लिया था। उनकी मृत्यु के बाद शव को गांव में ही दफनाया गया, जिससे आदिवासी समाज के लोग नाराज हो गए। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना गांव की सहमति और परंपरागत रीति-रिवाजों के शव दफन किया गया।
पहले देखिए ये तस्वीरें-









दो समुदायों में हिंसक झड़प, जमकर मारपीट
शव दफनाने के विरोध में आदिवासी समाज के लोग प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान दोनों समुदाय आमने-सामने आ गए। पहले डंडों से मारपीट हुई, फिर स्थिति बेकाबू हो गई। जवाबी कार्रवाई में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा।
चर्चों में तोड़फोड़ और आगजनी

हिंसा के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने पहले सरपंच के घर में तोड़फोड़ की, फिर गांव के एक चर्च में आग लगा दी। इसके बाद करीब तीन हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ आमाबेड़ा पहुंची, जहां एक और चर्च को आग के हवाले कर दिया गया। भीड़ तीसरे चर्च को जलाने के लिए आगे बढ़ रही थी।
पुलिस का लाठीचार्ज, ASP समेत 20 घायल
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान कई ग्रामीण, कवरेज कर रहे कुछ पत्रकार और ASP अंतागढ़ आशीष बंछोर समेत करीब 20 पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात को देखते हुए पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

शव को कब्र से निकाला गया, रायपुर भेजा गया
पिछले दो दिनों से ग्रामीण शव को बाहर निकालने की मांग कर रहे थे। गुरुवार को पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने भारी सुरक्षा के बीच शव को कब्र से बाहर निकाला। इसके बाद शव को जिले से बाहर रायपुर ले जाया गया। गांव में अब भी तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
गांव सील, बाहरी लोगों की एंट्री बंद
पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग-अलग क्षेत्रों में रखा है और बड़े तेवड़ा गांव को पूरी तरह सील कर दिया गया है। बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। आमाबेड़ा, नरहरपुर, चारामा, कांकेर, कोंडागांव, धमतरी और आसपास के इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।

परंपराओं के उल्लंघन का आरोप
आदिवासी समाज का कहना है कि गांव में अंतिम संस्कार को लेकर तय सामाजिक परंपराएं और नियम हैं, जिनका पालन नहीं किया गया। उनका आरोप है कि सरपंच ने पद का दुरुपयोग करते हुए दादागिरी दिखाई। वहीं धर्मांतरित समुदाय का कहना है कि अंतिम संस्कार उनके धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार किया गया है।
पहले से संवेदनशील रहा है इलाका
कांकेर जिले के 14 गांवों में पहले ही पास्टर और पादरियों के प्रवेश पर बैन लगाया जा चुका है। ग्राम सभाओं ने पेसा अधिनियम के तहत यह फैसला लिया था, जिसे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी सही ठहराया है। इसी पृष्ठभूमि में यह मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया।

