Iran New Supreme Leader:
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की यूएस-इजरायली हमले में मौत हो गई है. ईरान की सरकारी मीडिया ने उनकी मौत की पुष्टि की है. इसके बाद ईरान ने उनके सबसे बड़े बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि ईरान में सुप्रीम लीडर कैसे चुना जाता है और क्या है वहां का पॉलिटिकल सिस्टम.
ईरान में सुप्रीम लीडर का पद कितना अहम?
ईरान में सुप्रीम लीडर देश का सबसे शक्तिशाली पद होता है. सेना, न्यायपालिका, मीडिया, विदेश नीति और बड़े रणनीतिक फैसलों पर अंतिम अधिकार इसी पद के पास होता है. राष्ट्रपति सरकार चलाते हैं, लेकिन अंतिम नियंत्रण सुप्रीम लीडर के पास रहता है. ऐसी स्थिति में अगर सुप्रीम लीडर की मौत होती है, तो सत्ता का सवाल तुरंत खड़ा हो जाता है. ईरान का संविधान इस स्थिति के लिए स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है.
कौन हैं मोजतबा खामेनेई?
मोजतबा खामेनेई का जन्म 1969 में मशहद में हुआ था. उन्होंने धार्मिक माहौल में पढ़ाई की थी. ईरान-इराक युद्ध के अंतिम दौर में उन्होंने रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़कर काम किया था.
वे लंबे समय से अपने पिता के करीबी माने जाते थे. रिपोर्टों में कहा गया है कि वे पर्दे के पीछे रहकर कई अहम फैसलों में भूमिका निभाते थे. हालांकि उन्होंने कोई बड़ा सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन सेना और अर्धसैनिक बलों से उनके अच्छे संबंध बताए जाते हैं.
2009 के विरोध प्रदर्शन और मोजतबा
साल 2009 में ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. उस समय मोजतबा खामेनेई का नाम चर्चा में आया था. कुछ आरोप लगे थे कि उन्होंने प्रदर्शनों को सख्ती से दबाने में भूमिका निभाई. हालांकि इस पर आधिकारिक स्तर पर कोई स्पष्ट स्वीकारोक्ति नहीं हुई.
अब उनके सुप्रीम लीडर बनने के बाद देश में राजनीतिक बहस शुरू हो गई है. 1979 की इस्लामी क्रांति के समय वंश के आधार पर सत्ता देने का विरोध किया गया था. इसलिए कुछ लोग उनके चयन को लेकर सवाल उठा रहे हैं.
ईरान का धार्मिक पॉलिटिकल सिद्धांत
ईरान का शासन सिस्टम एक धार्मिक पॉलिटिकल सिद्धांत पर आधारित है. इसे विलायत-ए-फकीह के नाम से जाना जाता है. इसके तहत सुप्रीम लीडर देश में राष्ट्रपति और संसद से ऊपर सबसे बड़ी अथॉरिटी रखता है. यह पद मिलिट्री, ज्यूडिशरी, इंटेलिजेंस एजेंसी और मुख्य नेशनल पॉलिसी को कंट्रोल करता है.
कौन होता है सुप्रीम लीडर?
सुप्रीम लीडर ईरान में सबसे ताकतवर व्यक्ति होता है. यह नेशनल सिक्योरिटी, फॉरेन पॉलिसी और धार्मिक मामलों पर आखिरी फैसला लेने वाला होता है. यह सिस्टम 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद बनाया गया था, जब ईरान एक इस्लामी रिपब्लिक में बदल गया था. प्रेसिडेंट्स को पब्लिक वोट से चुना जाता है. लेकिन सुप्रीम लीडर को एक कॉन्स्टिट्यूशनल धार्मिक प्रक्रिया से चुना जाता है. यह पद आमतौर पर जिंदगी भर के लिए होता है जब तक की लीडर इस्तीफा न दे दे, काम करने में असमर्थ ना हो जाए या फिर उसकी मौत ना हो जाए.
एक्सपर्ट असेंबली का रोल
सुप्रीम लीडर को चुनने के लिए जिम्मेदार मुख्य अथॉरिटी एक्सपर्ट्स की असेंबली है. यह 88 सीनियर इस्लामिक मौलवियों की एक काउंसिल है. इन मौलवियों को ईरानी नागरिक हर 8 साल में चुनते हैं. इस वजह से यह बॉडी धार्मिक और इनडायरेक्टली डेमोक्रेटिक दोनों बन जाती है.
ईरान के संविधान के आर्टिकल 111 के तहत एक्सपर्ट्स की असेंबली सुप्रीम लीडर की मौत या फिर हटाए जाने के तुरंत बाद बुलाई जाती है. इसकी मुख्य जिम्मेदारी एक काबिल उत्तराधिकारी की पहचान करना, उसका मूल्यांकन करना और उसे अपॉइंट करना है. अगर सुप्रीम लीडर अपनी ड्यूटी पूरी करने में फेल हो जाता है तो काउंसिल के पास उसे हटाने का भी पूरा अधिकार है.
क्या होती है टेम्पररी लीडरशिप काउंसिल
जब तक एक्सपर्ट्स की असेंबली औपचारिक रूप से नए सुप्रीम लीडर को नहीं चुन लेती तब तक ईरान के संविधान के मुताबिक देश के मामलों को एक टेम्पररी लीडरशिप काउंसिल मैनेज करती है. इस काउंसिल में आमतौर पर तीन मुख्य अधिकारी होते हैं. ईरान के राष्ट्रपति, ज्यूडिशरी के हेड और गार्डियन काउंसिल के एक सीनियर सदस्य.
क्या है सुप्रीम लीडर का एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया?
ईरान के संविधान के मुताबिक सुप्रीम लीडर एक सीनियर शिया मौलवी होना चाहिए. इसे मुजतहिद भी कहा जाता है. इस व्यक्ति को इस्लामिक कानून की गहरी जानकारी, मजबूत लीडरशिप स्किल्स, और देश को राजनीतिक और धार्मिक रूप से गाइड करने की क्षमता होनी चाहिए. इस धार्मिक क्वालिफिकेशन के अलावा कैंडिडेट को राजनीतिक समझदारी, एडमिनिस्ट्रेटिव क्षमता और पब्लिक क्रेडिबिलिटी दिखानी चाहिए.
