CGPSC Prelims 2026
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 22 फरवरी 2026 को दो शिफ्ट में आयोजित की गई। पहली शिफ्ट सुबह 10 से 12 बजे और दूसरी शिफ्ट दोपहर 3 से 5 बजे तक हुई। परीक्षा रायपुर में 48 केंद्रों पर आयोजित की गई।
इस बार पेपर का स्तर मॉडरेट से टफ रहा, जिससे अभ्यर्थियों में उलझन देखने को मिली। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पेपर के स्तर को देखते हुए इस साल कटऑफ 5 से 10 अंक तक गिर सकती है।

25% अभ्यर्थी रहे अनुपस्थित
पहली शिफ्ट में कुल 19,247 में से 14,658 परीक्षार्थी शामिल हुए। उपस्थिति लगभग 76.16% रही।
दूसरी शिफ्ट में 14,363 अभ्यर्थी उपस्थित रहे, जो लगभग 74.64% है।
कुल मिलाकर औसत उपस्थिति करीब 75% रही, यानी लगभग 25% अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हुए। रायपुर में ही 4500 से अधिक कैंडिडेट अनुपस्थित बताए जा रहे हैं।
सामान्य अध्ययन पेपर ने बढ़ाई उलझन
एक्सपर्ट सुमित तिवारी के अनुसार, इस बार का सामान्य अध्ययन (GS) पेपर अपेक्षाकृत कठिन रहा।
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इंडिया GS में अर्थव्यवस्था और सामान्य विज्ञान से सीधे तथ्यों पर आधारित प्रश्न पूछे गए।
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छत्तीसगढ़ GS में योजनाएं, बजट, आर्थिक सर्वेक्षण और करेंट अफेयर्स से जुड़े प्रश्न कठिन स्तर के थे।
कई सवाल “कौन-सा सही/गलत”, “केवल 1-2”, “1-2-3”, “उपयुक्त सभी” जैसे विकल्पों के साथ थे, जिससे अभ्यर्थी कंफ्यूज होते दिखे।
CSAT रहा सामान्य स्तर का
सी-सैट (CSAT) का पेपर सामान्य स्तर का रहा।
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हिंदी और छत्तीसगढ़ी भाषा से 20 प्रश्न पूछे गए
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गणित और रीजनिंग आसान से मध्यम स्तर के थे
तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए CSAT क्वालिफाई करना ज्यादा मुश्किल नहीं माना जा रहा है।
कटऑफ 105–110 के बीच रहने की संभावना
एक्सपर्ट दीपांशु झा के अनुसार, सर्वे एनालिसिस के आधार पर इस साल जनरल वर्ग की कटऑफ 105–110 अंकों के बीच रह सकती है।
प्रश्नों का विश्लेषण:
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कुल 56 प्रश्न आसान
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18 मॉडरेट
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26 कठिन
कठिन और भ्रमित करने वाले प्रश्नों की अधिकता के कारण कटऑफ में गिरावट के संकेत हैं।

कुछ सवाल देखिए…








क्यों उलझन में पड़े अभ्यर्थी?
आंकड़ों की सटीकता सबसे बड़ी दिक्कत
सबसे पहली दिक्कत आंकड़ों की सटीकता को लेकर होती है। जैसे सिंचाई क्षमता 21.76 लाख हेक्टेयर है या 21.75, भू-जल का उपयोग 49.5% है या 50%—परीक्षा में ऐसे सूक्ष्म अंतर वाले आंकड़े पूछे जाते हैं। अगर अभ्यर्थी का याद किया गया आंकड़ा थोड़ा भी अलग हुआ, तो पूरा विकल्प गलत हो जाता है।
दूसरी बड़ी समस्या होती है कथनों का मिश्रण। एक ही सवाल में 3–4 स्टेटमेंट दिए जाते हैं, जिनमें कुछ सही होते हैं और कुछ आंशिक रूप से सही। परीक्षार्थी को हर एक कथन को अलग-अलग परखना पड़ता है। यह काम समय लेने वाला होता है और दबाव में गलती की संभावना बढ़ जाती है।
तीसरी बात, विकल्पों की बनावट खुद भ्रम पैदा करती है। जैसे—
केवल 1
केवल 2 और 3
केवल 1, 2 और 4
उपयुक्त सभी
इनमें अक्सर “उपयुक्त सभी” या “केवल 1, 2 और 4” जैसे विकल्प होते हैं, जो मनोवैज्ञानिक दबाव बनाते हैं। परीक्षार्थी सोचता है कि शायद कोई न कोई कथन छूट गया है।

याददाश्त बनाम समझ की लड़ाई होती है
चौथी दिक्कत होती है याददाश्त बनाम समझ की लड़ाई। ऐसे सवालों में तर्क या कॉन्सेप्ट कम और रटने वाले फैक्ट ज्यादा होते हैं। जिन अभ्यर्थियों ने आर्थिक सर्वेक्षण, बजट या सरकारी रिपोर्ट का हर आंकड़ा याद नहीं किया, वे खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।
पांचवीं समस्या है नकारात्मक वाक्य संरचना। जैसे—“कौन-सा कथन सही नहीं है”। पहले दिमाग सही खोजता है, फिर उसे गलत ढूंढने के लिए उल्टा सोचना पड़ता है। यह प्रक्रिया तनाव में और उलझा देती है।
इसी वजह से ऐसे सवाल अच्छे से पढ़े हुए अभ्यर्थियों को भी भ्रम में डाल देते हैं। कई बार परीक्षार्थी को जवाब आता हुआ लगता है, लेकिन विकल्पों की जटिलता और आंकड़ों की सूक्ष्मता उसे गलत उत्तर चुनने पर मजबूर कर देती है।
यही कारण है कि इस तरह के प्रश्न पेपर को कठिन नहीं, बल्कि भ्रमित करने वाला बना देते हैं और कट-ऑफ पर सीधा असर डालते हैं।
238 पदों पर होगी भर्ती
इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए कुल 238 पदों पर नियुक्ति की जाएगी।
मुख्य पद:
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51 पद – नायब तहसीलदार
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29 पद – मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO)
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28 पद – उप पुलिस अधीक्षक (DSP)
पिछले 10 वर्षों में पदों की संख्या 200–350 के बीच रही है। इस साल भी पदों की संख्या 200 से ऊपर बनी हुई है।
अब क्या करें अभ्यर्थी?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिजल्ट का इंतजार करने के बजाय तुरंत मुख्य परीक्षा (Mains) की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
