Bilaspur Train Accident-
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुए मेमू लोकल ट्रेन हादसे के बाद रेलवे प्रशासन की गंभीर लापरवाही सामने आई है।
कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) की जांच में खुलासा हुआ है कि जिस लोको पायलट को मेमू लोकल ट्रेन चलाने की जिम्मेदारी दी गई थी, वह रेलवे के साइकोलॉजिकल टेस्ट में फेल हो चुके थे।
इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने उन्हें पैसेंजर ट्रेन चलाने की अनुमति दे दी, जबकि यह टेस्ट ऐसी ट्रेनों के लिए अनिवार्य होता है।
इस हादसे में 11 यात्रियों की मौत और 20 लोग घायल हुए थे।
रेलवे अधिकारियों की गंभीर लापरवाही
लोको पायलट विद्यासागर पहले मालगाड़ी चलाते थे।
करीब एक महीने पहले उन्हें प्रमोशन देकर पैसेंजर ट्रेन संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी।
रेलवे नियमों के अनुसार, मालगाड़ी से पैसेंजर ट्रेन चलाने के लिए पदोन्नत किसी भी चालक को साइको टेस्ट (Psychological Test) पास करना आवश्यक होता है।
यह टेस्ट चालक की मानसिक संतुलन, निर्णय क्षमता और आपात स्थिति में प्रतिक्रिया की क्षमता का आकलन करता है।
जांच में पाया गया कि अधिकारी यह जानते थे कि विद्यासागर यह टेस्ट पास नहीं कर पाए थे, फिर भी उन्हें सहायक चालक के साथ मेमू ट्रेन चलाने की मंजूरी दी गई।
CRS ने 6 नवंबर को की लंबी पूछताछ
CRS जांच के तहत 6 नवंबर को डीआरएम कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों से घंटों पूछताछ की गई।
पूछताछ में एरिया बोर्ड, एआरटी, एआरएमवी इंचार्ज और कंट्रोलर डिपार्टमेंट के अधिकारी शामिल थे।
हर अधिकारी से लगभग एक से डेढ़ घंटे तक वन-टू-वन पूछताछ की गई।
पूछताछ में सामने आए अहम सवाल
CRS ने घटना के दौरान एरिया बोर्ड की एससीआर पूजा गिरी से सिस्टम में आई दिक्कतों और सिग्नल पैनल की स्थिति के बारे में सवाल किए।
इसके बाद एआरटी इंचार्ज अंशु कुमार से राहत टीम के रवाना होने का समय और संसाधनों की उपलब्धता पर पूछताछ हुई।
एआरएमवी इंचार्ज रवि किरण से मेडिकल वेन की स्थिति और राहत कार्यों की जानकारी ली गई।
पूछताछ का सिलसिला रात 10 बजे तक चला और पहले दिन करीब 10 लोगों से बयान लिए गए। बाकी अधिकारियों से पूछताछ अगले दिन की जानी थी।
घायल चालक और गार्ड का बयान अहम
हादसे में घायल असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज और मालगाड़ी गार्ड शैलेष चंद्र यादव का बयान सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दोनों अभी अपोलो अस्पताल में भर्ती हैं और CRS टीम उनके अस्पताल में जाकर बयान दर्ज कर सकती है।
हादसे की पृष्ठभूमि
4 नवंबर की शाम करीब 4 बजे, बिलासपुर के गेवरारोड स्टेशन आउटर पर मेमू लोकल ट्रेन और मालगाड़ी के बीच टक्कर हुई थी।
मेमू ट्रेन अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रही थी, जबकि सामने मालगाड़ी खड़ी थी।
टक्कर इतनी भीषण थी कि 11 यात्रियों की मौत हो गई और 20 घायल हुए।
घायलों का इलाज रेलवे अस्पताल, सिम्स और अपोलो अस्पताल में जारी है।
प्राथमिक जांच में हादसे की वजह ऑटो सिग्नलिंग सिस्टम की तकनीकी खराबी और प्रशासनिक लापरवाही बताई जा रही है।
CRS जांच रिपोर्ट पर रेलवे मुख्यालय की निगरानी
कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी बी.के. मिश्रा की अगुवाई में जांच जारी है।
रेलवे मुख्यालय ने सभी संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी है।
अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तय की जाएगी।
