Adani Power Strike: श्रमिकों की हड़ताल पर लेबर कोर्ट की रोक
छत्तीसगढ़ में अदाणी पावर लिमिटेड से जुड़े औद्योगिक विवाद मामले में रायपुर के श्रम न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। लेबर कोर्ट ने श्रमिक संघ द्वारा 8 दिसंबर से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने आशंका जताई कि हड़ताल जारी रहने से बिजली उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे आम जनता की परेशानियां बढ़ेंगी।
छह महीने तक या अगले आदेश तक हड़ताल स्थगित
श्रम न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया है कि श्रमिक संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल को छह महीने तक या अगले आदेश तक स्थगित किया जाता है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस अवधि में श्रमिक किसी भी प्रकार की हड़ताल, कार्य बहिष्कार या उत्पादन में बाधा नहीं डालेंगे।
16 सूत्रीय मांगों से शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, श्रमिक संघ ने इसी वर्ष 9 मार्च को अदाणी पावर प्रबंधन के सामने 16 सूत्रीय मांग पत्र रखा था। मांगों को लेकर सुलह प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन यह सफल नहीं हो सकी। सुलह विफल होने के बाद 5 दिसंबर को मामला श्रम न्यायालय पहुंचा, जिसके बाद श्रमिक संघ ने 8 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी।

बिजली आपूर्ति पर असर की आशंका बनी कारण
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अदाणी पावर लिमिटेड विद्युत उत्पादन और आपूर्ति से जुड़ी कंपनी है, जो छत्तीसगढ़ के साथ-साथ गुजरात और केरल राज्यों को भी बिजली सप्लाई करती है। ऐसे में हड़ताल से न केवल औद्योगिक गतिविधियां बल्कि जनहित भी प्रभावित हो सकता है।
औद्योगिक संबंध संहिता के तहत हड़ताल प्रतिबंधित
न्यायालय ने औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 का हवाला देते हुए कहा कि जब कोई औद्योगिक विवाद न्यायालय में लंबित हो, तब उस अवधि में हड़ताल पर कानूनन प्रतिबंध होता है। दोनों पक्षों के तर्क और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने हड़ताल पर रोक को उचित माना।
दोनों पक्षों को सहयोग के निर्देश, 2 जनवरी को अगली सुनवाई
लेबर कोर्ट ने श्रमिक संघ और अदाणी पावर प्रबंधन दोनों को निर्देश दिया है कि वे मामले के शीघ्र निपटारे में सहयोग करें। इस औद्योगिक विवाद की अगली सुनवाई 2 जनवरी को निर्धारित की गई है।

कोर्ट के आदेश पर अदाणी पावर की प्रतिक्रिया
कोर्ट के आदेश के बाद अदाणी पावर लिमिटेड ने कहा कि कंपनी न्यायालय के फैसले का सम्मान करती है और उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि उसकी प्राथमिकता जनहित और कानून का पालन करना है।

