Sambhal Mosque Eid Prayer-
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संभल जिले में मस्जिद के अंदर नमाज़ पढ़ने वालों की संख्या सीमित करने के प्रशासनिक आदेश को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं है तो अधिकारियों को इस्तीफा दे देना चाहिए या तबादला मांग लेना चाहिए। ⚖️
कोर्ट ने प्रशासन को लगाई कड़ी फटकार
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है।
अदालत ने कहा कि अगर स्थानीय प्रशासन यानी डीएम और एसपी नमाज़ियों की संख्या सीमित करने की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे, तो उन्हें अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है।


पूजा-अर्चना के लिए अनुमति जरूरी नहीं
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर संबंधित स्थान निजी संपत्ति (Private Property) है, तो वहां पूजा या इबादत करने के लिए सरकार से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती।
कोर्ट ने कहा कि राज्य का संवैधानिक दायित्व है कि हर समुदाय को अपने पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक धार्मिक अनुष्ठान करने का अधिकार मिले।
16 मार्च को होगी अगली सुनवाई
इस मामले में याचिका मुनाजिर खान की ओर से दायर की गई थी, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार, संभल के डीएम और एसपी को पक्षकार बनाया गया है।
राज्य सरकार ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है, जबकि याचिकाकर्ता ने नमाज़ स्थल से जुड़े तस्वीर और राजस्व अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा है।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को तय की है।
